Zindagi ka safar – Hindi motivational poem

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ज़िंदगी के सफ़र में तन्हा चलते रहे हम
मंज़िल न थी फिर भी आगे बढ़ते रहे हम

चाहत थी यही कोई हमारा भी हो
पर कैसे कोई करीब आता
खुद के लिये भी तो अजनबी ही रहे हम

ढूंढते रहे हम इस जहा में हमसफ़र अपना
रिश्तों की डोर से टूटते रहे हम

तन्हाइयो का मंज़र और दर्द भरा आलम था
ज़िंदा न थे फिर भी जीते रहे हम

गम को मिटाने , दिल को बहलाने
अपने ही आसु पिते रहे हम

आँखों में इंतज़ार था ज़िंदगी की नयी सुबह
के उगते सूरज का
बस इसी इंतज़ार में अबतक जीते रहे हम

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