Zindag hindi Poetry

Zindag hindi Poetry 1




ठोकर खाकर भी चलना पड़ता है
ज़िंदगी  है जीना पड़ता है

मुश्किलें तो आती है राहों में
उनपे विजय पाकर ही आगे बढ़ना पड़ता है

हर ख्वाहिश पूरी नहीं होती
कुश पाने के लिए कुश खोना पड़ता है

रोज नयी आशाएं पैदा होती है मन में
कभी  तो जीवन ही ख्वाबो जा शहर बन जाता है

राह सीधी हो तो चला जा सकता है आसानी से
असली मजा तो टेड़ी मेड़ी राहो पर ही आता है

कभी ख़ुशी तो कभी गम का स्वाद चखना पड़ता है
ज़िंदगी है जीना पड़ता है

*****************************




Zindag hindi Poetry 2

इच्छाओ को एक तरफ़ रख दो
खुद को जिने का हक़ दो

उड़ना चाहती है ज़िंदगी
उस सके जहा वो फलक दो

मन की चंचलता में अब न घिसा जायेंगा
जीवन की दिशा में लक्ष्य एक भेद दो

अनंत प्राण नहीं राही है यहाँ हम
पैर चले जिनपे वो सही पग दो

बेरंग सी हो गयी है ज़िंदगी
उमंग और ख़ुशी के रंग से भर दो

बहुत वजह मिली जीने के लिए
फिर  भी रास न आयी ज़िंदगी
अब खुद को  बेवजह जीने का एक अवसर दो

(Visited 32 times, 1 visits today)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *