हिंदी कविता – शाम हुई तो कहा

hindi poem busy life

व्यस्त हो गया ज़िदगी के कारोबार में

डूब गया न जाने किस मझदार में

 

दफ्तर के कागजो में लिपटी जिंदगी

हिसाब किताब में उल्ज़ी जिंदगी

साँझ से बेखबर

जब आई बाहर

तो आँखे पूछने लगी

शाम हुई तो कहा



ये रात कैसे आई

न नीला गगन न सूरज की किरण

न जिस्म को छुता हवाओ का आँचल

ये सभा गयी तो कहा

लम्हा वो हसीन कहा

शाम हुई तो कहा




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