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Zindag hindi Poetry

Zindag hindi Poetry 1




ठोकर खाकर भी चलना पड़ता है
ज़िंदगी  है जीना पड़ता है

मुश्किलें तो आती है राहों में
उनपे विजय पाकर ही आगे बढ़ना पड़ता है

हर ख्वाहिश पूरी नहीं होती
कुश पाने के लिए कुश खोना पड़ता है

रोज नयी आशाएं पैदा होती है मन में
कभी  तो जीवन ही ख्वाबो जा शहर बन जाता है

राह सीधी हो तो चला जा सकता है आसानी से
असली मजा तो टेड़ी मेड़ी राहो पर ही आता है

कभी ख़ुशी तो कभी गम का स्वाद चखना पड़ता है
ज़िंदगी है जीना पड़ता है

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Zindag hindi Poetry 2

इच्छाओ को एक तरफ़ रख दो
खुद को जिने का हक़ दो

उड़ना चाहती है ज़िंदगी
उस सके जहा वो फलक दो

मन की चंचलता में अब न घिसा जायेंगा
जीवन की दिशा में लक्ष्य एक भेद दो

अनंत प्राण नहीं राही है यहाँ हम
पैर चले जिनपे वो सही पग दो

बेरंग सी हो गयी है ज़िंदगी
उमंग और ख़ुशी के रंग से भर दो

बहुत वजह मिली जीने के लिए
फिर  भी रास न आयी ज़िंदगी
अब खुद को  बेवजह जीने का एक अवसर दो

Kaha hai Zindagi

Kaha hai Zindagi  Hindi poem on life 

 




बेमकसद,बेमतलब, बेमंज़िल है ज़िंदगी

आवरगी, आशिकी,अधूरी सी तलब है ज़िंदगी,

मोबाइल,कंप्यूटर और मशीनों की दुनिया है

लगता है विज्ञान की गुलाम है ज़िंदगी,

पढ़ लो सब Facebook , WhatsApp की किताबें

प्यार की भाषा अब कहा रही ज़िंदगी,

में तो ढूंढ रहा हु बंजारों की तरह 

ख्वाबो की गली-गली , यादो के शहर-शहर

कहीं मिल जाये तो जानु कहाँ है ज़िंदगी ?


 

जिंदगी से समझोता

zindagi se samzota

 




जिंदगी से जुदा में नहीं
मुझसे जुदा ज़िंदगी नहीं
जिंदगी से खफा में नहीं
मुझसे खफा ज़िंदगी भी नहीं
टूट गया हु में बिखर गयी है वो
बुरा में भी नहीं
बुरी वो भी नहीं
उसे खोके जीना मुझे भी नहीं
मेरे बगैर मरना उसे भी नहीं
वो साथ है मेरे में साथ हु उसके
विश्वास उसे भी नहीं मुझे भी नहीं
करना होंगा समझोता साथ बैठकर
मौत के आगोश में
रहेंगी जिंदा वो भी नहीं
रहूँगा जिंदा में भी नहीं