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पाना है मंज़िल को

पाना है मंज़िल को

पाना है मंज़िल को तो पानी की तरह बहते रहो

हर मुश्किल को आग की तरह जलाते रहो

मंज़िल तुम्हारी तुम्हारे कदमो में होंगी

बस निशाना लक्ष्य पर लगाते रहो

बस यु ही हम जागते रहे

रात भर ख्वाब मेरी आंखो पे सजते रहे

में जगता रहा नींद तड़पती रही

ख्वाब करीब थे नींदों से फासलेथे थ

आँखों में न आसू थे न दिल में था अक्स ख़ुशी का

बस यु ही हम जागते रहे

फिसुल  गया  एक दिन

नए दिन के खयालो में

रात भर जागते रहे

बस यु ही हम जागते रहे

सोया था सारा जहा

हम दो जहानों में जागते रहे

एक जहाँ से दुसरे जहाँ में जाने की

सुरंग बनाते रहे

बस यु ही हम जागते रहे

प्रिय पाठको ,

यह कविता आपको कैसी लगी हमे कमेंट  के माध्यम से जरुर बताये.

भगवन का जवाब

एक इंसान ने भगवान से कहा

ज़िन्दगी इतना दर्द दे रही है की

मेरा तुमपर से भी विशवास हट गया है

अब में मरना चाहता हु

भागवान ने भी बड़े प्यार से कहा

मर भी जायेंगा तो

तू उसी के पास जा पहुचेंगा

जिसपे तुम्हे विश्वास नहीं है

तू बड़े चैन से

तू बड़े चैन से सोती है अपने घर में

क्योकि तेरी यादे तुजे नहीं मुझें सताती है

काश मेरी यादो को भी वो हुनर होता

जो तुजे भी मेरी तरह

तड़पने पर मजबूर करता

तेरी मुस्कराहट में आसू छुपे है

तेरी मुस्कराहट में आसू छुपे है

मेरे खातिर पलकों की पीछे छुपे है

कैसा दर्द चुपाया है तुमने अपनी इन आखो में

जिससे मेरा दिल तड़प रहा है