इंतज़ार रहता है उससे मिलने का

इंतज़ार रहता है उससे मिलने का



इंतज़ार रहता है Hindi Poetry

 

 

 

 

 

 

 

दिन की शुरूआत अच्छी होती है 
जब वो बालकनी में खड़ी होती है

ख़्वाहिश तो रोज करता हु 
पर पूरी कभी कभी ही होती है

पास रहे तो ख़ुशी होती है
दूर रहे तो बेचैनी सी छा जाती है

पल में हँसी पल में दर्द दे जाती है
जैसे हवा छुके चली जाती है

इंतज़ार के सिवा क्या करता 

उसका जिक्र लब्जो में क्या कहु
रोज नयी अदा में नज़र आती है

इंतज़ार रहता है उससे मिलने का
कुश ऐसे ही जैसे 
सावन से पहले बारिश की याद आती है



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